वायरस और भ्रम ~

मानव शरीर में अनगिनत वायरस बैक्टीरिया रहते हैं, जिसका अभी तक मैडिकल साइंस जो अनुमान लगा पाई है वो लगभग 380 ट्रिलियन हैं..
और जो बाहर से शरीर पर हमला कर नुकसान पहुंचा सकते हैं उनकी गिनती करीब करीब 215 से 220 तक की है ऐसा वैज्ञानिक कहते हैं परंतु वास्तव में स्थिति क्या है ये कहना मुश्किल है और यदि इस बात की कोई गहरी जानकारी होती तो मैडिकल साइंस यूं हाथ पैर फुला कर न बैठ जाती..

चलिए यहां हम बाकियों को न छूते हुए केवल कोरोनावायरस का ही उदाहरण लेते हैं…

तो जैसे कि सबको मालूम ही है कि ये वायरस कब और कहां से सक्रिय हुआ और आज ऐसा कहा जा रहा है कि ये दुनिया भर में फ़ैल चुका है…

बात शुरू करते हैं जब ये खबरें आने लगीं के अब ये वायरस महामारी घोषित हो चुका है और अब इससे पार पाना मुश्किल है जिसका उदाहरण ये है कि इंग्लैंड के वैज्ञानिकों ने शुरुआती अनुमान लगाया था कि ये वायरस जो चीन से यहां आया है ये इंग्लैंड में लगभग 5 लाख और अमेरिका में 20 लाख लोगों की जान ले लेगा परंतु समय गुज़रते- गुज़रते इंग्लैंड सरकार के एडवाइजरी बोर्ड ने जिसमें 16 डाक्टरों और वैज्ञानिकों का समूह है, सरकार को बताया कि जैसा हमने माना था ये वायरस उतना खतरनाक नहीं निकला इसलिए लिहाज़ा हमने इसे ख़तरनाक बिमारियों की लिस्ट से निकाल देने का फ़ैसला किया है…

ये बात जब दुनिया के सामने आई तो लगभग सभी जगह से वही खबरें आने लगी कि वहां पर इतने केस आए वहां पर इतने,, तब तक तकरीबन देशों को लाॅकडाऊन ने अपनी चपेट में ले लिया था और सब जगह पैनिक ही पैनिक फैलाया चुका था….

स्थिति बिल्कुल भी साफ़ नहीं थी,, बस अटकलें थीं और ख़बरों में ख़ौफ़, और इस बीच इटली और स्पेन के वो मौतों के आंकड़ों को आपके और हमारे ड्राइंग रूम तक पहुंचाएं जा रहे थे….

भारत जैसे देश भी इससे अछूते न रह सके और यहां भी सब कुछ बंद करवा दिया गया…

फ़िर अचानक 24 फरवरी के The New England Journal of Medicine में छपी रिसर्च रिपोर्ट में बताया गया कि इस वायरस की मारक क्षमता मात्र 0.1% ही है जो थोड़ी बहुत कम ज़्यादा हो सकती है परंतु देखने में ये वायरस साधारण सीज़नल फ्लू के बराबर प्रतीत हो रहा है..

बस फ़िर आहिस्ता-आहिस्ता और भी रिसर्च सामने आने लगी जो रिसर्च संगठनों द्वारा अस्पतालों में जा-जा कर जुटाए गए आंकड़ों पर आधारित थीं जिसमें ये बताया गया कि इस वायरस का Ro (Rnaught) यानि फैलने की क्षमता मात्र 2.2% ही है और साधारण मौसमी फ्लू की की 2%… मतलब साफ़ था कि इसमें लाॅकडाऊन लगाने का कोई कारण ही नहीं बनता था,, हमारा शरीर ही इस वायरस के लिए बहुत बड़ा हथियार है..

लेकिन फ़िर वो इटली की ख़बरें,, जिसमें सारा इटली तबाह हो जाने के अंदेशे लगते रहते थे मीडिया चैनलों पर जिससे लोगों के दिलों में वायरस के प्रति डर और अधिक घर कर गया,, परंतु बाद में इटली के स्वास्थ्य मंत्रालय को प्रैस वार्ता करके बताना पड़ा कि इटली में जो 20 हज़ार लोगों ने जान गंवाई है उसमें से मात्र 1200 लोग ही ऐसे हैं जिनके डैथ सर्टिफिकेट पर मौत का कारण कोरोना यानि निमोनिया लिखा हुआ है,, परंतु ये सच किसी भारतीय मीडिया चेनल पर नहीं दिखाया गया बल्कि दिन-प्रतिदिन लोगों को डर के और क़रीब ले जाया गया सोची समझी रणनीति के तहत्…

यहां तक कि हर मौत को यूं रिपोर्ट किया गया जैसे मानों अगला नंबर हमारा ही हो ?? खाने की प्लेट से लोगों के हाथों से रोटी का निवाला छूट जाने लगा ऐसी भयावह स्थिति उत्पन्न कर दी गई…

परंतु फ़िर WHO और अमेरिका की लड़ाई ने आहिस्ता-आहिस्ता वायरस के खिलवाड़ से पर्दा उठाना शुरू किया,, हालांकि चीन अपना रोल प्ले करके किनारे बैठकर तमाशा देखने लगा..

सारी दुनिया से अच्छे पत्रकार और न्यूज़ चैनल बेहतर से बेहतर आंकड़े हमारे सामने लाते चले गए जिसमें हमारे भारतीय डाक्टर बिस्वरूप राय चौधरी जी का बहुत बड़ा योगदान है और स्थिति काफ़ी हद तक साफ़ होती चली गई…

फ़िर ये मालूम पड़ा कि जिन पांच छे देशों में कुछ हज़ार लोगों ने जाने गंवाई हैं उन देशों में सर्दी के इन तीध चार महीनों में इतने या इससे अधिक लोग अपनी जान गंवा ही बैठते हैं विभिन्न विभिन्न कारणों से क्यूंकि वहां औसतन उम्र ही 75 साल से ऊपर की है…

सारा वर्ष मौसम के ठंडा बना रहने के कारण वहां इन्फ्लूएंजा और निमोनिया होना आम सी बात है….

फ़िर यहां तक जब स्थिति साफ़ हो ही गई थी फ़िर खेल शुरू हुआ Hydroxychloroquin जैसी बेतुकी दवाईयों का जिनका वायरस को निष्क्रिय करने में कोई सार्थकता सिद्ध नहीं हुई है आजतक,, मात्र अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप के कहने पर भारत जैसे देश में पागलपन छा गया,, यहां डाक्टरों को दवाईयां हाथों में थमा दी गईं कि इन्हें एहतियातन खाना शुरू करें ताकि वायरस से बचाव किया जा सके जिसके फलस्वरूप असम के एक डॉक्टर की मौत हो गई जिसने Hydroxychloroquin को अधिक मात्रा में खा लिया केवल इस कारण से कि यदि वायरस हमला करेगा तो बचाव पहले ही हो जाएगा….

फ़िर कुछ ही दिनों बाद अमेरिकी डाक्टरों के एक संगठन ने Hydroxychloroquin को वायरस के लिए बेकार बता दिया और कहा कि इसके इस्तेमाल से यहां लोगों की जान पर बन आई है इसलिए इसका प्रयोग फौरन बंद हो जाना चाहिए…

फ़िर यहां ये जान कर हमारा ICMR भी सक्रिय हो गया और इस दवाई को इस्तेमाल के लिए रोक दिया गया परंतु तब-तक इस दवाई ने अपने हिस्से का नुक़सान कर ही दिया था…

जब लगभग सभी जगह ये पैनिक का माहोल चल ही रहा था इसी बीच CDC अमेरिका और WHO ने आंकड़े जानी किए कि इस वायरस को हमने जो समझा था वैसा नहीं पाया,, इसकी मारक क्षमता साधारण फ्लू के आसपास की ही है,, इससे संक्रमित 85 से 90% लोग तो यूंही ठीक हो जाते हैं बिना किसी इलाज के,, कुछ को ही अस्पताल ले जाने और वेंटिलेटर की आवश्यकता पड़ सकती है….

क्यूंकि अब और कोई चारा भी नहीं था,, वायरस के डर का खेल अब खुल चुका था,, अब आहिस्ता-आहिस्ता दुनिया भर से डाक्टर सामने आ कर खुलकर इस वायरस खेल का पर्दाफाश करने लगे जिसमें हाल ही में कैलिफोर्निया के डाक्टर डेनियल एरिक्सन हैं जिन्होंने प्रैस वार्ता करके वायरस के बारे में सभी भ्रम दूर कर दिए और बताया कि न कोई दस्ताने मास्क ही लगाने की आवश्यकता है और न ही किसी लाॅकडाऊन की ही आवश्यकता है,, ये एक साधारण सर्दी जुखाम से भी कम घातक फ्लू है जो जानलेवा बिल्कुल भी नहीं है…

ये सब देखकर सभी देशों में सरकारों को ये दिखने लगा कि जो सोच कर पाबंदियां लगाईं थीं वैसा कुछ नहीं निकला इसलिए आहिस्ता-आहिस्ता करके पाबंदियों को हटा दिया जाए जिसका प्रमाण आप भारतीय सरकार के ढीलेपन में देख ही रहे हैं…

क्यूंकि अब जो आंकड़े वायरस के चार महीनों बाद सामने आए हैं उनके मुताबिक ये वायरस से संक्रमित व्यक्ति मात्र 2.2% लोगों को ही संक्रमित कर सकता है,, जो साधारण फ्लू के फैलने के आंकड़े 2% के बराबर ही है… एक स्वस्थ व्यक्ति के लिए ये मात्र एक साधारण फ्लू के बराबर ही है…

ये सब आंकड़े लेकर भारत के ICMR और उच्च कोटि के माने जाने वाले डाक्टरों ने भी मोर्चा संभाला जो कि WHO और अमेरिका की गाइडलाइंस पर चलता है,, जिसमें AIIMS के डायरेक्टर डॉ रणदीप गुलेरिया ने प्रैस वार्ता में हाल ही में बताया कि ये वायरस बिल्कुल भी ख़तरनाक नहीं है….

जिससे बच्चा खुचा पर्दा भी गिर गया और जो पैनिक बना हुआ था… परंतु मीडिया चैनल आज भी अपनी ड्यूटी निभाने में लगे हैं,, और लगातार लोगों को डराने-धमकाने में लगे हैं रात दिन…
एक भी चैनल सकारात्मक और निडर होने वाली कोई ख़बर नहीं चला रहा,, सत्य से कोसों दूर…

मेरा निर्थक प्रयास रहा है कि लोगों तक ये बात पहुंचाई जाए कि भारत के ख़बरों वाले चैनल देखना छोड़ दिजिए,, तभी आप चीजों को बेहतर आकं पाएंगे…

अब तो हर्षवर्धन जैसे स्वास्थ्य मंत्री भी कहने लगे हैं कि भारत की स्थिति बेहतर से बेहतर होती जा रही है…

भला कोई पूछे कि किसमें बेहतर होती जा रही है भाई ?? झूठ बोलने में ??? जब ये वायरस यहां कोई नुक्सान पहुंचा ही नहीं सकता था तो कैसी स्थिति और कैसे हालात ???

ये फ्लू वायरस युरोप अमेरिका जैसे देशों के लिए ख़तरा है,, जहां हर साल इन महीनों में हज़ारों लाखों लोग मारे जाते हैं,, परंतु भारत जैसे देशों में जहां जलवायु और वातावरण बिल्कुल यूरोप के विपरित है,, यहां वैसा करो ख़तरा हो ही नहीं सकता…

भारत में जो मौतें हो रही हैं,, इनका कोई आंकड़ा स्वास्थ्य मंत्रालय ने जारी नहीं किया,, क्या कारण थे ?? मरने वालों को पहले क्या क्या बिमारियां थीं,, किस व्यक्ति को क्या उपचार दिया गया कुछ भी नहीं सांझा किया गया…

बस ख़बरों में यही चलता रहा कि कोरोना से फलां फलां जगह आज ये मर गया आज वो मर गया…

इटली सरकार की तरहां भारत सरकार को भी सही और मान्य आंकड़े जारी करने चाहिएं जिससे लोगों का डर दूर हो सके….

ख़ैर ये सब तो होता ही घोषित महामारियों में,, फिल्मी सितारों से लेकर खेल के खिलाड़ियों तक लोगों को आगाह करते विज्ञापनों में सारा दिन डर का माहोल बनाने में मददगार रहते हैं…

परंतु जो बात महत्वपूर्ण है वो ये है कि ये सब होने के बाद भी यदि हमें समझ न आए तो हमसे बड़ा बेवकूफ कोई और न होगा…

अंतराष्ट्रीय स्तर पर इस तरीके के षड्यंत्रों का दौर चलता आया है चलता रहेगा,, HIV AIDS का खेल हमारे सामने है,, इसी तरीके से और भी बहुत से षड्यंत्र होते चले आए हैं…

ख़ैर अब और ज़्यादा आपके दिमाग पर बोझ न डालते हुए दो ही बातों से ये लेख समाप्त करना चाहूंगा..

पहला ये कि अपनी सोच, समझ और जानकारी को बढ़ाने का प्रयास करें…

दूसरा ये कि बेहतर खान पान और शारीरिक अभ्यास से अपने शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को इतना बढ़ा दें कि ऐसा कोई वायरस या षड्यंत्र आपके बगल से भी होकर गुजरने में दस बार सोचने पर मजबूर हो जाए…

और इस लेख से मेरी अपील है भारत सरकार से कि तुरंत इस लाॅकडाऊन को खोल देना चाहिए जिससे गरीब लोगों का ये कड़ा इम्तिहान ख़त्म हो सके…

सतर्क रहें और स्वस्थ रहें…..

धन्यवाद……….

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