महामारी में आतंक

जम्मू-कश्मीर में एक बार फिर जोर पकड़ रही आतंकी घटनाएं चिंता का विषय हैं। एक ऐसे समय में, जब न सिर्फ भारत बल्कि पूरी दुनिया कोरोना के संकट से जूझ रही है, आतंकवाद का सिर उठाना पूरी मानवता के लिए एक बड़ी चुनौती है। बीते सोमवार को जम्मू-कश्मीर के हंदवाड़ा में सीआरपीएफ की पेट्रोलिंग टीम पर आतंकी हमला हुआ जिसमें सीआरपीएफ के तीन जवान शहीद हो गए। उसके एक दिन पहले इसी इलाके में आतंकवादियों के साथ हुई मुठभेड़ में एक कर्नल और एक मेजर समेत पांच सुरक्षाकर्मी शहीद हो गए थे। हाल के कुछ महीनों में सेना को हुआ यह सबसे बड़ा नुकसान है।

पिछले साल जब अनुच्छेद 370 को हटाया गया और बड़े पैमाने पर सुरक्षाबलों की तैनाती की गई तो लगा कि अब आतंकी संगठनों के हौसले पस्त हो जाएंगे। कुछ समय तक जमीनी तौर पर ऐसा महसूस भी हुआ। लेकिन पाबंदियों में ढील दिए जाने के साथ ही आतंकियों की पुरानी हरकतें फिर शुरू हो गईं। उन्होंने गांव-गांव तक अपना नेटवर्क बना लिया है और ग्रामीणों पर दबाव बनाकर, उन्हें डरा-धमका कर या बंधक बनाकर उनसे जरूरी जानकारियां हासिल करते रहते हैं। हंदवाड़ा में भी उन्होंने ग्रामीणों को बंधक बना लिया था। जम्मू-कश्मीर में लॉकडाउन शुरू होने के बाद से आतंकी घटनाओं में और बढ़ोतरी हुई है। सेना को जितना नुकसान लॉकडाउन से पहले पूरे साल में हुआ था उससे कहीं ज्यादा लॉकडाउन के 40 दिनों में हो चुका है। सुरक्षाबलों का अनुमान है कि आतंक से संबंधित घटनाओं में वृद्धि की एक वजह गर्मियों की शुरुआत भी हो सकती है। दरअसल, गर्मियां शुरू होते ही नियंत्रण रेखा (एलओसी) के पास बर्फ पिघलने लगती है। इससे घुसपैठ आसान हो जाती है और कश्मीर क्षेत्र में उग्रवादी गतिविधि बढ़ जाती हैं। सर्दियों के दौरान घुसपैठ करने के अधिकतर मार्ग बर्फ से पटे रहते हैं।

खुफिया सूचना यह है कि लगभग 300 आतंकवादी एलओसी पर पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) से भारत में घुसपैठ करने की फिराक में हैं। इसके लिए पाकिस्तान लगातार संघर्ष विराम का उल्लंघन कर रहा है। इस साल पिछले कुछ वर्षों की तुलना में सीजफायर तोड़ने के मामले में 50 फीसदी से अधिक की वृद्धि देखी गई है। कोरोना की आड़ लेकर पाकिस्तान सरकार ने हाफिज सईद और अन्य कई आतंकवादियों को जेल से रिहा कर दिया है।

साथ ही वह गिलगित-बाल्टिस्तान को अपना पूर्ण राज्य बनाने की कोशिश कर रहा है। पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को 2018 के एक प्रशासनिक आदेश में बदलाव कर गिलगित-बाल्टिस्तान में चुनाव कराने की इजाजत दी है। जाहिर है, सुरक्षाबलों को बेहद सतर्क रहना होगा। कोरोना के आतंक के बीच उनके लिए अपनी ड्यूटी को अंजाम देना बेहद मुश्किल है। एक तरफ उन्हें खुद को संक्रमण से बचाना है, दूसरी तरफ राष्ट्र रक्षा की अग्रिम पंक्ति वाली भूमिका भी निभानी है। हमें अपनी सेना और अर्धसैनिक बलों का मनोबल बढ़ाना होगा, उन्हें सारी सुविधाएं उपलब्ध करानी होंगी और कूटनीतिक स्तर पर पाकिस्तान की चालों का जवाब भी देना होगा।

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